साक्षी नाम की १५ वर्षीय लड़की और उत्तर प्रदेश का सी.ओ.स्तर का अधिकारी अमरजीत शाही ,कोई सोच भी नहीं सकता था कि एक १५ वर्षीय नाजुक कोमल सी लड़की उसका मुकाबला कर पायेगी पर उसने किया और अपना नाम तक नहीं बदला क्योंकि उसका मानना है कि मुजरिम वह नहीं उसका उत्पीड़न करने वाला है और उसी की हिम्मत का परिणाम है कि १४ अगस्त को शाही को अपहरण ,बलात्कार और आतंकित करने के जुर्म में दोषी पाया गया और तीन दिन बाद उसे १० साल की सख्त कारावास और ६५,००० रूपये का अर्थ दंड भरने की सजा सुनाई गयी. बंगलुरु में महिला अधिकारी की इज़्ज़त लूटने के प्रयास में जवान बर्खास्त . कंकरखेड़ा मेरठ की आशा कहती हैं कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ कानून से काम चलने वाला नहीं .कानून की कमी नहीं पर इसके लिए समाज को भूमिका निभानी होगी .लाडलो पर अंकुश लगाना होगा . नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में २०१३ में दर्ज किये गए रेप के मामले में प्रत्येक १०० मामलों में ९५ दोषी व्यक्ति पीड़िताओं के परिचित ही थे .अभी हाल ही में घटित लखनऊ निर्भया गैंगरेप में भी दोषी मृतका का परिचित ही था .इसलिए ऐसे में महिलाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे सतर्क रहे और संबंधों को एक सीमा में ही रखें . बच्चों की शिकायतों पर गौर करें और ज़रूरी कदम उठायें संबंधों को मात्र संबंध ही रहने दें न कि अपने ऊपर बोझ बांयें . सामाजिक रूप से बच्चों की और अपनी दोस्ती को घर के बाहर ही निभाने पर जोर दें और बच्चों से उनके दोस्तों के बारे में जानकारी लेती रहें . यही नहीं कानून ने भी इस संबंध में नारी का साथ निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है और भले ही यह अपराध उन्हें तोड़ने की लाख कोशिश करे किन्तु वे टूटें नहीं बल्कि इसका डटकर मुकाबला करें . आज यदि देखा जाये तो महिलाओं के लिए घर से बाहर जाकर काम करना ज़रूरी हो गया है और इसका एक परिणाम तो ये हुआ है कि स्त्री सशक्तिकरण के कार्य बढ़ गए है और स्त्री का आगे बढ़ने में भी तेज़ी आई है किन्तु इसके दुष्परिणाम भी कम नहीं हुए हैं जहाँ एक तरफ महिलाओं को कार्यस्थल के बाहर के लोगों से खतरा बना हुआ है वहीँ कार्यस्थल पर भी यौन शोषण को लेकर उसे नित्य-प्रति नए खतरों का सामना करना पड़ता है .
नारी नहीं है बेचारी

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